Thursday, 9 February 2017

एक अंतहीन दिशा में !

मेरा बढ़ना धीरे धीरे
एक दिशा में
एक मंज़र की तलाश में
सफ़र में चलते हुए
नदी में तैरते हुए
पहाड़ चढ़ते हुए
आख़िर दिखाई दिया
अंतहीन आसमान।

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